पुरातत्वविदों ने प्राचीन मिस्र के पिरामिडों और फिरौन के मकबरों की खुदाई के दौरान शहद के ऐसे बर्तन खोजे हैं जो 3,000 से अधिक वर्ष पुराने हैं और आज भी पूरी तरह से सुरक्षित और खाने योग्य हैं!
शहद कभी खराब क्यों नहीं होता?
शहद की इस अमरता का रहस्य इसके रासायनिक गुणों में छिपा है। सबसे पहले, शहद में नमी (पानी) की मात्रा बहुत कम (लगभग 17%) होती है, जिसके कारण बैक्टीरिया और कवक इसमें जीवित नहीं रह सकते। दूसरा, शहद प्राकृतिक रूप से अम्लीय (Acidic) होता है, जिसका pH 3.2 से 4.5 के बीच होता है।
इसके अलावा, मधुमक्खियां अमृत को शहद में बदलते समय ग्लूकोज ऑक्सीडेज नामक एंजाइम मिलाती हैं, जिससे थोड़ी मात्रा में हाइड्रोजन पेरोक्साइड बनता है जो एंटीसेप्टिक का काम करता है। यही कारण है कि सीलबंद शहद कभी खराब नहीं होता!
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